मंज़िल

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ना जाने कहा हो तुम

ना जाने कैसे हो तुम

हो भी या फिर हो गुम

किस्से पूछूँ तेरा ये पता

कौन है वो जो दे मुझे ये बता

क्या तुम ही हो इस काफिर कि मंज़िल

या तुमसे भी आगे जाता है कोई रास्ता

                                       – सुरंजन सरकार

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